मेरा पहला Mothers Day! 

मुझे मालूम है शीर्षक देख कर आपने सोचा होगा कि mothers day तो कब का बीत गया और ये madam अब जाग रही हैं!! पर बात दर असल ऐसी है कि blogging की दुनिया में में बहुत नई हूँ। अपनी ज़िंदगी के सबसे अनोखे पहले अनुभव को कागज़ पर उतारना आसान नहीं है। इसीलिए सोचते सोचते वक़्त बीत गया और ये blog अब तैयार हुआ। 

  साल 2017 मेरे जीवन का एक अनूठा मोड़ लेकर आया या यूं कहूँ कि मुझे एक नया जीवन ही मिल गया। वो कहते हैं ना कि ज़िन्दगी में हर पहली चीज़ से एक गहरा लगाव और रिश्ता बन जाता है…. जीवन का हर पहला बेहद खास होता है। 

2017 में मुझे जो सौगात मिली वो है मातृत्व। मैं पहली बार माँ बनी। पहली बार मातृत्व की भावना को समझने का मौका मिला। पहली बार एहसास हुआ कि मेरी माँ ने किस तरह एक एक पल त्याग करके मुझे बड़ा किया होगा। पहली बार एहसास हुआ कि एक नन्ही सी जान जो 9 महीने तक आपके अंदर पनप रही थी, जिसके लिए आप एक एक कदम फूंक फूंक कर रखते आए थे वो जब सामने आती है तो कैसा लगता है !

31 जनवरी 2017 को मेरा बेटा अद्वित मुझे मिला! अब उससेे जुड़ी हर चीज़ मेरे लिए पहली है और हर वो पहला लम्हा बेहद खास। इसी कड़ी में हाल ही में बीता mothers day भी मेरा पहला था और ज़ाहिर है एक भाव विभोर कर देने वाला दिन था।

मुझे कविताएं लिखने का शौक है या यूं कहूँ कि मुझे अपने दिल के गहरे ख्याल किसी से कहने में या बताने में कठिनाई होती है इसलिए वो अनकहे जज़्बात कविताओं के रूप में निकल कर मेरी diary में कैद हो जाते हैं। अब चाहे वो जज़्बात हंसाने वाले हों, रुलाने वाले या कुछ सोचने को मजबूर करने वाले।

अपने पहले mothers day पर भी मेरा कवि हृदय जाग उठा और दिल की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए जो कविता लिखी थी वो आज आप से बांटती हूँ-

समय के स्वर्णिम पंख हैं कैसे

अविरल गति से बढ़ते जैसे। 

अभी ही तो बीते थे वो पल

तुम अंश बन जब मेरे भीतर आए, 

अनकहे अनसुलझे से वो डर

जब नौ महीनों में अंत को आए ।

अभी ही की तो बात है वो भी,

जब मन तुम्हारी छवि को बुनता था, 

तुम स्वस्थ रहो सुबुद्ध रहो, 

बस यही कामना करता था। 

फिर वो दिन भी झूमता आ ही गया 

जब तुम आए मेरी दुनिया में, 

वो मन में बसी तस्वीर भी अब

प्रत्यक्ष थी मेरी बाहों में। 

वो टिम टिम करती काली आंखें,

वो कोमल कोमल से नाज़ुक हाथ

अब तुम ही मेरी दुनिया हो,

अब हर पल उत्सव है तुम्हारे साथ।

हर दिन दिखलाते तुम नया रूप

हर पल होती कोई नई अदा,

माँ बन बीते मास तीन और चौदह दिन,

पर अमर रहेगा ये प्रेम सदा।

जब माँ मेरी कहती थी यही

खुद माँ बनोगी तो पता चलेगा,

क्यों होती है चिंता क्यों टोकती हूँ

उसका भी तुमको उत्तर मिलेगा।

आज सत्य हुई मेरी माँ की बात

हर क्षण तुम्हारी चिंता होती है,

बेसुध सोने वाली लड़की भी देखो

अब श्वान निद्रा सोती है।

ईश्वर ने माँ तो बना दिया

अब इस माँ का है ध्येय यही,

नन्ही जान को अपनी अब

सिखलाना है चुनना पथ सही।

यूँ तो आज है मेरा पहला मातृ दिवस

जब मेरी नन्ही दुनिया है मेरे साथ

तेरी निश्छल मुस्कान से लेकिन

नित हैं मातृ दिवस और रात!!

परमेश्वर से अनुपम उपहार मिला

उपहार का मान बढ़ाना है,

मातृ दिवस पर संकल्प यही अब,

श्रेष्ठ मानव तुमको बनाना है।

सबके हृदय में तुम राज करो,

ऐसा उत्कृष्ट, अद्वित बनाना है।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s